अस्सलामु अलैकुम।
"बहुत से लोग जादूगरों के पास जाते हैं और डिप्रेशन (अवसाद) का जादू करवाते हैं। यह इतना खतरनाक जादू है कि लोग इसे बिल्कुल समझ नहीं पाते और धीरे-धीरे पीड़ित का सब कुछ बर्बाद हो जाता है। पीड़ित को इसका जरा भी अंदाजा नहीं होता।
जादूगर पीड़ित के दिमाग और दिल को निशाना बनाता है ताकि उसका डिप्रेशन बढ़ाया जा सके। इसे बढ़ाकर, जादूगर पीड़ित के हर काम को रोक देता है या उल्टा कर देता है। उसका कोई भी काम ठीक से नहीं होता। जादूगर अपनी रूहों के जरिए पीड़ित के दिलो-दिमाग में यह संदेश भेजता है: 'तुम बेकार हो, तुम कुछ नहीं कर सकते।' इससे पीड़ित के मन में लगातार नकारात्मक विचार और घोर निराशा पैदा होती रहती है।"
"इसमें डिप्रेशन (अवसाद) के जो लक्षण आते हैं, वे ये हैं:"
1.
अत्यधिक निराशा: इंसान हर चीज़ से निराश हो जाता है।
2.
काम न बनना: पीड़ित व्यक्ति का कोई भी काम नहीं बनता।
3.
दिल की घबराहट: दिल कमज़ोर महसूस होता है और धड़कन तेज़ हो जाती है।
4.
चिड़चिड़ापन और आत्म-संवाद: इंसान खुद से और अपनी ज़िंदगी से चिढ़ने लगता है और खुद से ही सवाल-जवाब करता है।
5.
जीने की इच्छा समाप्त होना: जीने की तमन्ना खत्म हो जाती है और इंसान बार-बार कहता है कि सब कुछ बेकार है।
6.
आत्महत्या का प्रयास: यदि स्थिति गंभीर हो, तो इंसान बार-बार खुदकुशी की कोशिश करता है।
7.
गुस्सा और झगड़ा: अवसाद के दौरान पीड़ित व्यक्ति बहुत ज़्यादा गुस्सा और लड़ाई-झगड़ा करता है।
8.
अकेलापन: पीड़ित अकेले रहना पसंद करता है और उसे किसी से मिलना-जुलना पसंद नहीं होता।
9.
बार-बार रोना: महिला पीड़ित होने पर उसका बार-बार रोने का मन करता है।
10.
छोटी बातों पर दुखी होना: छोटी-छोटी बातों पर बहुत जल्दी उदास हो जाना।
11.
नींद में समस्या: नींद बहुत खराब रहती है और सोते समय भी मन में निराशा के विचार आते रहते हैं।
12.
खुद को कोसना: मरीज़ हर समय खुद को कोसता रहता है।
13.
आत्महत्या के विचार: स्थिति गंभीर होने पर इंसान हर समय खुदकुशी के बारे में सोचता और बातें करता रहता है।
14.
अजीब व्यवहार: पीड़ित व्यक्ति कभी-कभी अजीब हरकतें, प्रतिक्रियाएं और बातें करता है।
15.
दुनिया से हार मान लेना: व्यक्ति दुनिया से जल्दी हार मान लेता है और काम करने या दुनिया में रहने की इच्छा छोड़ देता है।
16.
अत्यधिक संवेदनशीलता: इंसान बहुत संवेदनशील हो जाता है और छोटी बातों का बुरा मानकर अजीब व्यवहार करने लगता है।
इसका इलाज यह है:
हर नमाज़ के बाद सूरह अल-राअद (अध्याय संख्या 13) की आयत संख्या
28 को 100 बार पढ़ें:
اَلَّذِیْنَ اٰمَنُوْا
وَ تَطْمَىٕنُّ قُلُوْبُهُمْ بِذِكْرِ اللّٰهِؕ-اَلَا بِذِكْرِ اللّٰهِ
تَطْمَىٕنُّ الْقُلُوْبُ
(अनुवाद: जो लोग ईमान लाए उनके दिलों को अल्लाह की याद से सुकून मिलता है। बेशक, अल्लाह की याद में ही दिलों का सुकून है।)
और सूरह अल-फ़तह (अध्याय संख्या 48) की आयत संख्या
4 को भी हर नमाज़ के बाद 100 बार पढ़ें:
هُوَ الَّذِي أَنْزَلَ
السَّكِينَةَ فِي قُلُوبِ الْمُؤْمِنِينَ لِيَزْدَادُوا إِيمَانًا مَعَ
إِيمَانِهِمْ ۗ وَلِلَّهِ جُنُودُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ
عَلِيمًا حَكِيمًا
(अनुवाद: वही है जिसने मोमिनों के दिलों में तसल्ली (सुकून) उतारी ताकि उनके ईमान के साथ उनका ईमान और बढ़ जाए; और आसमानों और ज़मीन के सब लश्कर अल्लाह ही के हैं, और अल्लाह सब कुछ जानने वाला और हिकमत वाला है।)
इंशाअल्लाह, 7 दिनों तक पढ़ने से ही काफी फायदा होगा। इसे 40 दिनों तक लगातार पढ़ते रहें ताकि डिप्रेशन का सारा असर खत्म हो जाए।
आमिन सोनाम संपर्क (Amel Soname Contact)
"अगर आपको कोई भी सवाल करना है, तो मुझसे सीधा संपर्क करें। इस ईमेल के अलावा हमारी कोई और दूसरी किसी भी किस्म की हेल्प (मदद) या सपोर्ट नहीं है।"
dua main yaad rakhya ga
amel soname
amel_soname@yahoo.com
No comments:
Post a Comment